आखिर क्यों - सुशांत
सुशांत मेरे पास तुम्हारे प्रति कोई दया भाव नहीं है ...... क्योंकि आपने सम्मान, शोहरत, पुरस्कार और दौलत होने के बाद भी आत्महत्या कर ली । मैंने सुना था कि आपने AIEEE में 7वाँ स्थान पाया था, आप अपनी पोस्ट से लोगों को प्रतोत्साहीत करते रहते थेे जिससे उनकी निराशा खत्म हो । पर क्या अपने इस वैश्विक महामारी में सड़को पर हजारों किलोमीटर चलने वाले मजदूरों को नहीं देखा, नहीं देखा कैसे एक मां अपने बच्चे को बैग पर खींचे ले जा रही थीं, नहीं देखा एक बेटी अपने पिता को साईकिल पर हजारों कि.मी. आग बरसती धूप में लेकर चलती रही थी । शायद नहीं देखा ही होगा, क्योंकि यदि देखा होता तो जीने का हौसला आता, कायरों की तरह मरते नहीं 😕😕। सैकड़ो किलोमीटर का लंबा सफर बिना किसी भोजन और सवारी के बिना करना, साथ ही साथ मन में इस बात का भय की आगे क्या होगा कहाँ से करूँगा परिवार का जीविकोपार्जन । इसके बाद भी हँसते हुए चलते जाना कि हाँ फिर वक़्त बदलेगा जरूर, फिर एक ऐसा दिन आएगा कि जिंदगी सामान्य हो जाएगी फिर खुशियां लौटेंगी और हम फिर से मुश्कुरा उठेंगे । कभी-कभी हमें वो लोग सिखाते है जिनको हमें सीखना था । मानव मस्तिष्क ...