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Showing posts from June, 2020

आखिर क्यों - सुशांत

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सुशांत मेरे पास तुम्हारे प्रति कोई दया भाव नहीं है ...... क्योंकि आपने सम्मान, शोहरत, पुरस्कार और दौलत होने के बाद भी आत्महत्या कर ली । मैंने सुना था कि आपने AIEEE में 7वाँ स्थान पाया था, आप अपनी पोस्ट से लोगों को प्रतोत्साहीत करते रहते थेे जिससे उनकी निराशा खत्म हो । पर क्या अपने इस वैश्विक महामारी में सड़को पर हजारों किलोमीटर चलने वाले मजदूरों को नहीं देखा, नहीं देखा कैसे एक मां अपने बच्चे को बैग पर खींचे ले जा रही थीं, नहीं देखा एक बेटी अपने पिता को साईकिल पर हजारों कि.मी. आग बरसती धूप में लेकर चलती रही थी । शायद नहीं देखा ही होगा, क्योंकि यदि देखा होता तो जीने का हौसला आता, कायरों की तरह मरते नहीं 😕😕। सैकड़ो किलोमीटर का लंबा सफर बिना किसी भोजन और सवारी के बिना करना, साथ ही साथ मन में इस बात का भय की आगे क्या होगा कहाँ से करूँगा परिवार का जीविकोपार्जन । इसके बाद भी हँसते हुए चलते जाना कि हाँ फिर  वक़्त बदलेगा जरूर, फिर एक ऐसा दिन आएगा कि जिंदगी सामान्य हो जाएगी फिर खुशियां लौटेंगी और हम फिर से मुश्कुरा उठेंगे । कभी-कभी हमें वो लोग सिखाते है जिनको हमें सीखना था । मानव मस्तिष्क ...

असीमित रोज़गार के अवसर उत्पन्न करता कोरोना काल

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वैश्विक महामारी के बीच पूरा विश्व बेराजगारी से जूझ रहा है, वहीँ इस महामारी ने वास्तविक और भविष्य में होने वाले स्व-रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न किए हैं  | जहाँ भारत जैसे बड़े देश में आन लाइन व्यापार को लेकर दुविधा थी , लेकिन महामारी ने सभी व्यवसायों को एक ऐसे रास्ते पर ला दिया है की सभी व्यवसायों को किसी ना किसी तरह आन लाइन सेवाओं से जोड़ना पड़ रहा है  | इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण व्यवसाय को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ना और उनके लिए उपलब्ध सेवाओं और उत्पादों की जानकारी को आन लाइन सेवाओ की माध्यम से इच्छुक उपभोक्ताओं तक पहुँचाना है | परन्तु हमे तो गुलामी की आदत सी पड़ चुकी है , मन में आत्मविश्वास मानो कुपोषित हो चूका है , आलस ने ऐसा घर बना लिया है की हम किसी भी स्थिति में कोई बड़ा कदम उठाकर खुद के व्यवसाय की कल्पना से भी डरते हैं और इसी का फायदा उठाते हुए बहुत सी कम्पनिया हमारे बुजदिली को ऐसा अवसर दे रही है की हम उसको रोज़गार समझ उसमें अपने समस्त जीवन को झोंक देते हैं और अंत तक हमे मिलता कुछ भी नहीं , हम सिर्फ दैनिक जीवन की आपूर्ति मात्र करते रह  जाते  है | इस महामारी के दौर ने जह...